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Varun Choudhary

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"Falling in love you remain a child; rising in love you mature. By and by love becomes not a relationship, it becomes a state of your being. Not that you are in love - now you are love."

"We all cling to the past, and because we cling to the past we become unavailable to the present."

Osho


Osho Satsang (Blog)

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  • 13–ध्या्न: परम संवेदना
    मैं चाहता हूं कि तुम्हाकरा जीवन संवेदनशील हो, गहन संवेदना से भरा हो। और इसी सारी संवेदना के बीच में ध्यासन की संवेदना पैदा होती है। ध्यासन परम संवेदना का नाम है। जब तुम्हाररी सारी इंद्रियाँ अपनी समग्रता में, अपनी परिपूर्णता...
  • 12–धर्म विज्ञान है
    घर्म प्रयोग है, विचार नहीं। घर्म प्रक्रिया है, चिंतना नहीं। घर्म विज्ञान है, दर्शन नहीं। घर्म फिलासफी नहीं है, साइंस है। निश्चित ही प्रयोगशाला कोई बाहरी प्रयोगशाला नहीं है। कि जहां आप जाएं...
  • सत्र—5 ‘नमो सिद्धाणं नमो-नमो।‘
    जब बचपन में मैं अपने नाना के पास रहता था तो यही मेरा तरीका था, और फिर भी मैं सज़ा से पूरी तरह सुरक्षित था। उन्होंतने कभी नहीं कहा कि यह करो और वह मत करो। इसके विपरीत उन्हों ने...
  • सत्र—4 खजुराहो
    मैं तुमसे उस उस समय कि बात कर रहा था जब ज्योीतिषी से मिला जो अब संन्याासी हो गया था। उस समय मैं चौदह वर्ष का था और अपने दादा के साथ था। मेरे नाना अब नहीं रहे थे।...

Osho Ganga (Blog)

  • अर्थ, काम, धर्म और मोक्ष
                                                  सन्‍यास के समय मनसा आनंद--1993-94
    हिंदुओं ने चार पुरूषार्थ कहे है: अर्थ, काम, धर्म और मोक्ष। काम है साधारण आदमी की वासना,और अर्थ है उसे भरने का उपाय। धन की हम आकांक्षा इसलिए...
  • सत्संग
    सत्‍संग को पूरब में बहुत मूल्‍य दिया है। पश्चिम की भाषाओं में सत्‍संग के लिए कोई ठीक-ठीक शब्‍द नहीं है। क्‍योंकि सत्‍संग का कोई मूल्‍य पश्‍चिम में समझा नहीं गया।
          सत्‍संग का अर्थ इतना ही है।...
  • ताज महल पर ध्यान

    तामहल सूफी फ़क़ीरों की कल्‍पना है। बनवाया तो एक सम्राट ने, मगर जिन्‍होंने योजना दी, वे सूफी फकीर हैं। जिन्‍होंने निर्माण किया,वे भी सूफी फकीर है। इसलिए ताज महल करे...
  • खजुराहो के मंदिर और आध्यात्मितक सेक्सो
    तंत्र ने सेक्‍स को स्प्रिचुअल बनाने का दुनिया में सबसे पहला प्रयास किया था। खजुराहो में खड़े मंदिर, पुरी और कोणार्क के मंदिर सबूत है। कभी आप खजुराहो की मूर्तियों देखी। तो आपको दो...

Shabd Manjusha (Blog)

  • होश के बस दो कदम--(कविता)

    सब चले जब हजारों  कदम,
    मैं तो चल पाय दो ही कदम।
    इस तिमिर अंधकार में भी,
    बंद आंखों के सहारे,
    किस डगर पर,
    किस सफर पर,
    दौड़ें सब चले जा रहे थे।
    किस तरफ...
  • कविता--भूख
    भूख (20रूऔर एक थाली के लिए भगदड़ में 65 सै ज्‍यादा जाने गई)

    ऐ देश तुझे क्‍या हो गया है?
    रोटी के चंद टुकड़ो के लिए
    हम जान की बाजी लगाते है।

    भूख आंतें,
  • पोनी--आत्‍म कथा (भाग--3)

    काल चक्र का चलना एक नियति हैं, इसकी गति मैं समस्वरता हैं,एक लय वदिता हैं, एक माधुर्य हैं एक पूर्णता है। जो चारों तरफ फैले जड़चेतन का भेद  किए बिना, सब...
  • कौन हो तुम--कविता
    कौन हो तुम
    है सृष्टि के लबों पर,
          फैलतीमुस्‍कान हो तुम।
    गीत गाते भ्रमरों के,
          गुंजका गुंजान हो तुम।।


    गा रहा है गीत कोई,
    थी कभी नीरवता सोई।
    बैठ कर अकुलाहटों में,
    दूर...